टूटूं अगर जो तो

बाहों में भर ले

ख़ामोशी की चीखों

को आँखों से पढ़ ले


बिखरूं अगर जो तो

बाहों में भर ले

हाथों की लकीरों को

अपनी मुट्ठी में कर ले


लड़खड़ाऊं अगर जो

तो बाहों में भर ले

बेचैनियों भरी राहों

को सुकून में बदल दे


मशवरा नहीं निर्णय जो ले ले

चाहिए कोई ऐसा

जो परख के दायरों में नहीं

समझ के घेरे में जकड़ ले

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