आंखों में उभरते सवाल देखकर
वो रुक गया गुस्से का उबाल देखकर
चीखती हुई फरमाईशों का
मलाल देखकर
वो थम गया दिल का
वबाल देखकर
तमन्नाओं का होता
हर पल इंतक़ाल देखकर
वो रो दिया सब्र बेमिसाल देखकर
खामोशियों का फ़ैला
हर तरफ़ जाल देखकर
वो सहम गया जज़्बातों का बवाल देखकर
आंखों में उभरते सवाल देखकर
वो हँस दिया अभिनय कमाल देखकर
वो हँस दिया अभिनय कमाल देखकर
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वबाल(बोझ/भार)


