आज फ़िर दिल हो चला है उदास
देखिए आज दिल को सुकून दे पाए कौन
दर्द की सिलवटों को हटा
एहसासों की तह पर तह लगा पाए कौन
खुशियों में तो हो जाता है हर कोई शामिल
ग़म की बरखा में मुस्कुराहटों की
छतरी आज फैला पाए कौन
अपने पराए की रेखाओं को लांघ
घावों पर स्नेह का मरहम लगा पाए कौन
जज़्बातों की गठरी अब हो चली भारी
ना जाने गांठों को इसकी सब्र से खोल पाए कौन
आज फ़िर दिल हो चला है उदास
देखिए आज दिल को सुकून दे पाए कौन
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