दस्तक के कान नहीं होते

फिर भी सुनाई दे जाती है....


खामोशियों की कोई ज़ुबान नहीं होती

फिर भी बहुत कुछ कह जाती हैं....


नज़रों में भावनाएं नहीं होती

फिर भी भावुक हो जाती हैं....


दिल कोई कांच नहीं होता

फिर भी टूट जाता है....


चेहरा कोई फूल नहीं होता

फिर भी मुरझा जाता है....


सपनों के पंख नहीं होते

फिर भी ऊंची उड़ान भरते हैं....


सन्नाटे की कोई आवाज़ नहीं होती

फिर भी शोर सबसे ज़्यादा होता है...


अपनेपन की कोई शक्ल नहीं होती

फिर भी पहचान में आ जाता है....


रिश्ते कोई वस्तु नहीं

फिर भी उनका दाम सबसे ऊंचा होता है

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