जिंदगी भर समेटते ही रहेफिर भी पूरा सामान बिखरा है,झोपड़ी ने सहेज कर रखामहलों में खानदान बिखरा है..!!
जिंदगी भर समेटते ही रहेफिर भी पूरा सामान बिखरा है,
झोपड़ी ने सहेज कर रखामहलों में खानदान बिखरा है..!!