कवि हूँ मैं...
जिसने लिक्खा है लफ्ज़ों को
जिसने गाया है शब्दों को
आख़िर कौन हूँ मैं, कवि हूँ मैं...
जिसने लिक्खा प्यार का साज़
जिसने गायी इश्क़ की धुन
आख़िर कौन हूँ मैं, कवि हूँ मैं...
जिसने लिक्खा आँख का पानी
जिसने गाया दिल का दर्द
आख़िर कौन हूँ मैं, कवि हूँ मैं...
जिसने लिक्खी दिल की धड़कन
जिसने गायी अधूरी साँसें
आख़िर कौन हूँ मैं, कवि हूँ मैं...
जिसने लिक्खा है रिश्तों को
जिसने गाया है बंधन को
आख़िर कौन हूँ मैं, कवि हूँ मैं...
जिसने लिक्खा रात का चाँद
जिसने गाया ख़्वाब अधूरा
आख़िर कौन हूँ मैं, कवि हूँ मैं...
जिसने लिक्खा है बादल को
जिसने गाया है बारिश को
आख़िर कौन हूँ मैं, कवि हूँ मैं...
जिसने लिक्खी दिलकश गज़लें
जिसने गायी रंगीन नज़्में
आख़िर कौन हूँ मैं, कवि हूँ मैं...