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ख्वाब


मेरे ख्वाब मर चुके हैं:-उन्हें जिंदा मैं ही करूँगा ,

कल तक रेंगते थे:-उन्हें परिंदा मैं ही करूँगा ,

जो कम्बख्त जलते हैं:- मुझसेमाँ कसम:- उन्हें तो शर्मिंदा मैं ही करूँगा ,

मेरे ख्वाब मर चुके हैं:-उन्हें जिंदा मैं ही करूँगा ,

— रोहित के.डी.
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