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इजहार


धड़कनों में:-अजीब हलचल है ,

इस जिस्म में:- तोरूह भी कलतक है ,

जो बात दिल में हैं:-उसे जुबां से आज ही 'कह' दूंगा ,

और:– उसके हाँ कहते ही ,गंगा में नहाकर सारे पाप 'बह' दूंगा ,

— रोहित के.डी.
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