[ प्रेम में कोई शहर ]
यह शहर रमा है प्रेम में
गंगा नदी को एक सांस में
पार करता है यह शहर
गया जाने वाली रेल पर
एक तितली आकर बैठती है
जो बस दरभंगा जा रही है
उसकी आखिरी सीट पर
ऊँघ रही है एक चिड़िया
कितनी आवाज़ है चारों ओर
पर कोई गा रहा है
बीच सड़क पर
फसल को काटते समय
गाया जाने वाला लोक गीत
शहर का वह हिस्सा
जो कभी खेत था
वहाँ सड़कों पर
अनाज के दानों की
बारिश हो रही है
सारा शहर थम गया है |
रोहित ठाकुर


