जब मैं सोचता हूँ नदी के बारे में 

क्या नदी मेरे बारे में सोचती है 

कई बार गया नदी के पास 

नदी अकेले लौटने नहीं देती 

गीली रेत आती है मेरे साथ 

क्या थोड़ी सी नदी भी आती है 

जीवन में कई ऐसे क्षण आये 

जब मैं हाँफ कर नदी के पास गया 

मैं उस समय और बहुत दिनों बाद भी 

सोचता रहा 

किसी नदी को हाँफते हुए न देखूँ 

नदी ने कभी खाली हाथ लौटने नहीं दिया 

कुछ चमकीले पत्थर हाथ पर रख दिए 

बहुत दिनों से मन में एक बात आती है 

दिसम्बर में अपना कोट 

नदी को पहना आऊँगा 

और 

जब मैं एक ऐसे प्रदेश में हूँ 

जहाँ दूर तक कोई नदी बहती नहीं है 

चमकीले पत्थरों में 

नदी तक जाने का रास्ता ढूंढता हूँ ।


रोहित ठाकुर