अपनी नाकामयाबी का ठीकरा सब पर है फोड़ता,
झूठ बोलने मे माहिर है, लम्बी लम्बी है फेंकता,
पर वो कमबख्त कभी आईना नहीं देखता।।
अभिनेताओ से भी अच्छा अभिनय है वो करता,
जहाज़ में उड़कर भी खुद को फ़क़ीर है वो कहता,
पर वो कमबख्त कभी आईना नहीं देखता।।
देश से ज्यादा अपनी छवि से है वो प्यार करता,
बस चुनाव के वक्त ही अपनी माँ को है याद करता,
पर वो कमबख्त कभी आईना नहीं देखता।।
कभी-कभी लोगों को कपड़ो से भी है वो पहचानता,
कभी लोगो को जंगल भेजने की बात है वो करता,
पर वो कमबख्त कभी आईना नहीं देखता।।
वादो की पूछो तो देशद्रोही घोषित है वो करता,
कुछ ना मिले तो भरी सभा में आँसू है वो बहाया करता ,
पर वो कमबख्त कभी आईना नहीं देखता।।
बिना बुलाये बिरयानी खाने है वो जाया करता ,
हर सवाल का जबाव ढाक के तीन में बताया है करता,
पर वो कमबख्त कभी आईना नहीं देखता।।


