जीते जागते सपनों का सम्मान यूँ ही नहीं जाता
बिन संघर्ष के जीने से सपना यूँ ही नहीं बन जाता,
तू हो अडिग, अनुशासन में जब तेरा जीना आयेगा
सपना जीता पायेगा, तू फिर से मुस्करायेगा।
पल भर की बेचैनी नें दिन पर डेरा डाला है
छोटा सा शब्द हुआ भारी इक दिन को यूँ ही दफनाया है,
तू रख संयम, बिन सोचे ही जब तेरा जीना आयेगा
सपना जीता पायेगा, तू फिर से मुस्करायेगा।


