आख़िर इस आवारगी में कोई रहगुजर मिल गया

तुम मिले, मंज़िल मिली और रास्ता मिल गया।

कुछ इस क़दर बरसी है ख़ुदा की इनायत मुझ पर,

थक कर हारने से पहले मुझको तूॅं मिल गया।

मुझको ज़ालिम कहे या क़ासिम कहे यह दुनियाॅं,

तुझे आते हुए देखा तो एक सबब मिल गया।

अब तो दूर-दूर जाती है मुझसे तन्हाईयां मेरी,

तुझसे मैं पहली दफ़ा आ गले मिल गया।


~ रोहित कुमार 'रोहू'