आज ना जाने कहां से उठ आया ये लाख टके का सवाल
आखिर हे क्या इश्क प्रेम प्यार का बवाल
आशिक से पूछो तो खुदा की खुदाई या खुद खुदा है प्यार
टूटे दिल की आवाज़ कहे है ये जानलेवा दो धारी तलवार
अमीरों की विलासिता है प्यार
गरीब के लिए अवास्तविकता का सार
मुझसे पूछो तो बहुरूपदशॆक जैसा इसका संसार
जिसको जैसा दिखे वही उसके सत्य की गुहार
कोई खुद में प्यार ढूंढने निकला
तो किसी को प्यार में खुद की तलाश
-रोहित धलारिया


