आज कुछ अजीब चल रहा है मन में बैठा हूँ अकेला इस कमरे में खिड़की से बाहर देख रहा हूँ पक्षी दिख रहे हैं,आसमान दिख रहा है एक कबूतर भी बैठा है अकेला शोर है कमरे में चलते पंखे का सड़क से गुज़रते वाहनो का दूर कहीं बात करते हुए लोगों की आवाज़ भी सुनाई दे रही है लेकिन कुछ शांति है दरवाज़े पर चींटी चलती हुई पहले कभी नहीं देखी सिर से टूट कर गिरा हुआ बाल फ़र्श पर पंखे की हवा से नाच रहा है कबूतर को साथी भी मिल गया काँपी के पन्ने अपने आप पलटने को तैयार हैं आज बहुत सी चीज़ें ऐसी दिख रही हैं जो पहले कभी नहीं दिखी आज शायद आँखे खुली हैं ।