ना हो मन में कोई ईर्ष्या,

ना द्वेष का समावेश हो 

गंगाजल जैसे हो पावन भक्ति,

आस्था में गजराज का बल हो।


श्रद्धा, प्रेम और सच्चे मन से 

आराधना हो सिद्धि विनायक की,

मन साफ़ हो व भावना निश्छल,

प्रथम उपासना हो गौरीनंदन की


ना मस्तिष्क में हो दुविधा,

ना मन मे कोई संशय हो ।

मिटें सब कष्ट तन के,

विघ्न दूर हो सबके जीवन से।


सबका मंगल करें श्री विघ्नेश,

जयघोष वक्रतुण्ड का सर्वत्र हो ।

सद्भावना का हो मार्ग प्रशस्त ,

क्षमा सबके सब पाप दोष हो ॥


राकेश की क़लम से

@RakeshMalhotra