सवेरा


ख़ुशियों का होगा जल्द सवेरा 

भागेगा दूर अंधेरा 

आज से बेहतर होगा कल 

हर पल होगा उज्जवल 


फिर से गाएगी धरती 

दुख के छँट जाएँगे बादल 

फिर छनकेंगीं पायल

नदियों की होगी कल कल 


फिर भँवरे की होगी गुनगुन 

घुँघरू की होगी झुन-झुन 

फिर से कोयल चहकेगी 

ख़ुशबू फूलों की महकेगी


फिर आँखों मे होगी नींदिया 

माथे पर चमकेगी बिंदिया 

फिर होगी चेहरे पर मुस्कान 

स्वस्थ सुखी होगा हर इंसान


~राकेश की क़लम से ✍