ना कोई ख़्वाब ना कोई ख्वाहिश

ना आरज़ू कभी चाँद को पाने की 

बांध कर सर पर कफ़न निकले थे घर से

ज़िद उन्हें थी वतन पर मर जाने की


दिखाकर अदम्य साहस और दमख़म 

शहीद हो गए वो भारत देश की ख़ातिर 

सर्वस्व अपना कर दिया जिन्होंने अर्पण 

शान ऊँची तिरंगे की करने में वो थे माहिर


विजय भारत देश को दिलाई 

किया गर्व से ऊँचा देश का माथा

नहीं भुलेगा राष्ट्र कभी उनके शौर्य

पराक्रम, और बलिदान की गाथा 


लहु तक अपना उन्होंने कर दिया अर्पण 

ताकि सुरक्षित रहे हम सब का जीवन 

वंदन है भारत माता के सच्चे सपूतों को 

शत शत नमन है सेना के अमर शहीदों को 

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कारगिल विजय दिवस पर भारतीय सेना के

पराक्रम, शौर्य और बलिदान को कोटि कोटि नमन 


राकेश की क़लम से