मेरे सपनों को हंसना मुस्कराना सिखा दिया

राहों की सब मुश्किलों को आसाँ बना दिया

गिर कर उठना, उठकर चलना सिखा दिया

मेरी परवाज़ को आसमाँ से भी  ऊँचा उड़ा दिया

 

संस्कारों की बुनियाद पर

मेरे वजूद को सशक्त बना दिया

सारथी बनकर

जीवन की दिशा और दशा को बदल दिया

आत्मविश्वास को मेरे

भीम के जैसा बलवान बना दिया

सफलता का भेद गहरा

सहजता से समझा दिया

संघर्ष की कठिन घड़ियों में मार्गदर्शक बनकर

जीवन में आगे बढ़ने का गुरुमंत्र सीखा दिया

 

औरों को सुख देने से मिलती है ख़ुशियाँ

निष्कर्ष है जीवन मंथन का ,

अमृत यह अद्भुत मुझको पिला दिया  

एक तिनके को डुबते का सहारा बनना सिखा  दिया

स्वार्थ और सेवा का अंतर  

सरलता से समझा दिया 


चुनौतियों के अंधेरों को

आशा के सवेरों से मिटाना सिखा दिया

एक दिए को तूफ़ान से लड़ना सिखा दिया

निर्भीक और निडर बना कर मुझको

मुश्क़िलों से लड़ना सिखा दिया  


नहीं है शब्द ऐसे जो

पिता का पावन प्यार

कभी वर्णित कर पायें

असहाय शब्द है

अहसास निःशब्द है,

ख़ामोशी संवाद है

योगदान उनका चुपचाप है

 

शब्द सीमित है

रहते मौन है

व्यक्त करना चाहते प्यार है

आपका वंदन और

आत्मिक आभार है 

 

संकल्प यह दोहराएँ  कि

ऐसा कुछ कर पाएं कि  

पिता के जैसा बन पायें 

उन्हें हम पर गर्व हो

जब उन के बताये रास्ते

हम पर चल पायें


~राकेश की कलम से

   

Rakesh Malhotra