मेरा शहर
राकेश की कलम से
मेरा शहर
कितना निडर है
आने वाले कल से
बेख़बर है
जल्द भूल गया
क़रोना का क़हर है
करोना अभी गया
नही किधर है
बिना मास्क के
घूमता इधर उधर है
मौत का भी इसको
नहीं कोई डर है
ना दो गज की दूरी
न मास्क जरुरी
नहीं जान की अपनी
इसे कोई फ़िक्र है
किसी भी बात का होता
नहीं इस पर कोई असर है
न अपनों की परवाह
ना दूसरों की कोई फ़िक्र है
बिना मास्क के घूमना
जैसे खाना कोई ज़हर है
बिना दो गज की दूरी के
नहीं जान की खैर है
मेरा शहर है
नहीं इसे किसी की
कोई फ़िक्र है
आने वाले खतरे से
बेखबर है
लगवाई नहीं इसने
अब तक दवाई है
आचरण मे फिर
इसके ढिलाई है
असावधानी इस
कद्र दिखाई है
की फिर जान
पर बन आई है
मेरा शहर है
नहीं इसे किसी की
कोई फ़िक्र
![मेरा शहर [ My City ]](https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/post_pics/%40rmalhotra/None/corona-4912807_1920_09-04-2021_10-23-14-AM.jpg)
