जब फुर्सत मिलती है

खुद से बात कर लेता हूँ

अंतर्मन में झाँक कर

मन का हाल जान लेता हूँ

 

बेचैनी, बेबसी और उदासी

की नब्ज पहचान लेता हूँ

विश्वास और उम्मीद के आसरे

आसमां छूने की ठान लेता हूँ    

 

मन को समझाता हूँ

खुद को जीत लेता हूँ

कभी खुद से यूँ ही

हार मान लेता हूँ

 

कभी दायरे बनाता हूँ

लक्ष्मण रेखा खींच लेता हूँ

कभी ख्वाबों की ऊँची

उड़ान भर लेता हूँ

 

सही-गलत रास्तों पर दौड़ती

जिंदगी को कुछ पल थाम लेता हूँ

मन के निर्भीक दर्पण में

अहंकार को पहचान लेता हूँ

 

जब फुर्सत मिलती है

खुद से बात कर लेता हूँ

अंतर्मन में झाँक कर

खुद को जान लेता हूँ


राकेश की कलम से  

@rakeshmalhotra

Rakesh Malhotra