किस से कहें


किस से कहें

कैसे कहें

क्या क्या कहें

क्या न कहें

कौन है जो

मन की सुने

फुर्सत किसे

जो दो पल रुके

दर्द दिल का

कोई कब तक सहे

तन्हा कोई कब तक रहे

रिश्ते रंग बदलते गए

जो कभी सुर्ख थे

वो जर्द होते गए

वक़्त के साथ

बनते और बिगड़ते गए

हमसफ़र मिलते और

बिछड़ते गए

दरख्तों से पत्ते टूटते गए

जो कभी किसी का साया थे

दरख़्त वोह सूखते गए

उम्र के दौर गुजरते गए

मायने जिंदगी

के बदलते गए

शायद कभी हकीकत

ज़िन्दगी की दिखाई दे

ये सोच कर

आईने हम बदलते गए



@राकेश की कलम से 

@rakeshmalhotra