बनके तारीख़ वक़्त
बस गुज़रता रहा
सफ़र ज़िंदगी का
यूँही चलता रहा
जो तलाश में फ़ुर्सत
की मसरूफ रहा
वक़्त हाथ से उसके
निकलता गया
~ राकेश की कलम से
![फ़ुर्सत [ Fursat ]](https://kavishalalab.s3.ap-south-1.amazonaws.com/post_pics/%40rmalhotra/None/clock-1725871_1920_24-07-2021_03-37-04-AM.jpg)

बनके तारीख़ वक़्त
बस गुज़रता रहा
सफ़र ज़िंदगी का
यूँही चलता रहा
जो तलाश में फ़ुर्सत
की मसरूफ रहा
वक़्त हाथ से उसके
निकलता गया
~ राकेश की कलम से