दर्द


जिधर देखो उधर दर्द है 

दर्द ही दर्द हर तरफ़ है 

गाँव गाँव शहर शहर है 

हवा मे घुला हुआ ज़हर है 


सहमा सहमा सा हर शख्स है 

जान की फ़िक्र शाम और सहर है 

ना जाने किस बेदर्द ने फैलाया है 

मौत का यह खौफनाक क़हर है 


अब ना दवा में ना ही दुआ में 

बचा कोई असर है 

ज़िन्दगी को जहाँ मिल जाएँ साँसें 

वो चौखट ना जाने खो गई किधर है 


एक उम्मीद है जो तब तक बाक़ी है 

जब तक मौजूद तेरा दर है 

रहेगा अक़ीदा मज़बूत जब तक 

तब तक मुझको नहीं कोई डर है


राकेश की कलम से 

@RakeshMalhotra