भगवान है कहाँ !


वो नासमझ है जो पुछते ये सवाल है 

कि ख़ुदा है तो नज़र क्यों नहीं आता 

कहाँ है उसका ठिकाना वो किस जगह मौजूद है 

कैसी है उसकी सूरत कैसा उसका वजूद है


जिनके मन में विश्वास होता है 

ईश्वर सदा उनके साथ होता है 

जहाँ करूणा का भाव होता है 

ईश्वर वहीं आस पास होता है 


वो हर घड़ी मन के आस पास होता है 

ज़र्रे जर्रे मे उसकी मौजूदगी का अहसास होता है 

फूल पतों में, पेड़ पौधों में, नदियों झरनों में 

कुदरत का कण कण उसका ही वास होता है 


जो रात दिन करते है नि:स्वार्थ सेवा 

वो असल में भगवान का ही तो रूप है 

निष्काम सेवा ईश्वर का ही तो स्वरूप है 

मानवता ही भगवान है वही उसका वज़ूद है 


राकेश की क़लम से

Rakesh Malhotra