रात की चादर में एक अजीब सा

सन्नाटा समाया है,

चाँदनी की धवल चांदनी ने धरा को

अपने में समेटा है।

सितारों ने बिखेरी है झिलमिलाती

चमक की लड़ियां

ख़ामोशी ने ये कैसा सपनों का

राग गाया है।


"राजयोग"