घर का दरवाजा बन गया है लक्ष्मण रेखा।
बिन बुलाई मौत लगा रही है बाहर फेरा।
डर का मंजर ऐसा कभी किसी ने न देखा।
जीवन पूरा बन गया है बस सांसो का डेरा।


घर का दरवाजा बन गया है लक्ष्मण रेखा।
बिन बुलाई मौत लगा रही है बाहर फेरा।
डर का मंजर ऐसा कभी किसी ने न देखा।
जीवन पूरा बन गया है बस सांसो का डेरा।