जगाने आया है कोईजब आया है मेरा नींद।दरवाजा खुल के देखी मेंआया है ईद!खुश नहीं मैं खुश नहीं कोईधरती पे जितना है लोक।सब दुखी हैजितना है मुल्क।
जगाने आया है कोईजब आया है मेरा नींद।दरवाजा खुल के देखी मेंआया है ईद!
खुश नहीं मैं खुश नहीं कोईधरती पे जितना है लोक।सब दुखी हैजितना है मुल्क।