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संघर्ष


दफ़न होके बीज एक,जड़े फिर से खोलता। दर्द छिपाता वो,बातें हौसलों की बोलता। जिस जमीं ने उसे जान दी,उसे न कभी छोड़ता। जिस आसमां से गिरा था,उसी की तरफ़ दौड़ता।

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