तेरे धून में पिया मै भी रहती हूँ,

सोचती हूँ बस मै ना कहती हूँ। 


मेरे नैनो को बस आस तेरी पिया,

संग नैनो के मै भी तो सहती हूँ। 


मै नदी तुम समंदर हो मेरे पिया, 

तुमसे मिलन को ही मै बहती हूँ। 


मै कली तुम चमन हो मेरे पिया,

अपनी खुशबू से ही मै सिहरती हूँ। 


मै सारंगी तुम बैरागी कंधे पिया, 

उन कंधों पर ही मै निखरती हूँ। 


- रिया शुक्ला