"अपनी गुनाहों पर नज़र डाल ऐ बन्दे,
"इतनी बोझ तु कब तक उठायेगा,
"ये रास्ता बड़ा लम्बा है यार,
"इस बोझ के साथ चलेगा तो जल्दी थक जायेगा,
"क्या सोचता है मुसाफिर,
"अकेले मे किये गये गुनाहो की सजाओं से तु बच जायेगा,
"ये उस खुदा कि नगरी है साहब,
"यहाँ हर दिन, हर पल अपने गुनाहो कि सजा तु पायेगा,
"जिन्दगी जीने आया है,
"थोड़ा ढंग से जी ना मेरे यार,
"ऐसे ही गुनाह करता रहा,
"तो खुदा को क्या मुँह दिखायेगा !!
#RiyaJaiswal


