ये जो हर पन्नों पर लिखावट आ जाती है मेरी,
है कहानी मेरी।
है बिखरे हुए लव्ज कुछ जो कहते है बहुत कुछ ,
कुछ तो राज़ है ,
जिसने बनाया इन्हें खास है।
शायद उम्मीद मे है,
खुद से मिलने की तिस्ऩगी मे है ।
ये जो हर पन्नों पर लिखावट आ जाती है मेरी,
है कहानी मेरी।
दिल को छू जाए,
तो हर लव्ज़ सच्चा
वरना ये एक फसाना है,
खुद को बयां करने का
छोटा सा बहाना है।
और कुछ इस तरह
चलता रहा सिलसिला ये,
लव्ज़ आते रहे
मैं बयां करता रहा जजबात ये।
ये जो हर पन्नों पर लिखावट आ जाती है मेरी,
है कहानी मेरी।
पूरी नहीं कुछ अधूरी सी है,
क्योंकि थे कुछ लव्ज़ जो स्याही मे बह गए।
उनको सांझा कर न पाई
कहानी पूरी कर न पाई ।
खामोशी थी मेरी जो सह गई,
जो बात थी वो दिल मे ही रह गई,
शक्शियत पर मेरी उदासी छा गई।
ये जो हर पन्नों पर लिखावट आ जाती है मेरी,
है कहानी मेरी।
भरी महफिल मे भी तन्हा,
रौश्नी मे भी अँधेरा।
फिर भी कहीं एहसास है
तेरी तलब का।
रोज झाकता मकान में मुझे,
मालिक बन करता कबूल मुझे।
ख्वाहिश मे मेरी,
मयसर होना तेरा।
ऊल्फत मे तेरी,
मुसलसल होना मेरा।
क्या कहूँ तारीफ मैं तेरी,
पूरी करता है तू कहानी मेरी।
ये जो हर पन्नों पर लिखावट आ जाती है मेरी,
है कहानी मेरी,
है कहानी तेरी।