यूँ उस रात हुई गोली की "धाँय"
सरहद पर किसी को हमारी याद आयी
हालात थे मुश्किल
जगह थी कारगिल
जंग हमने नहीं चाही थी
पर कायर हम भी नहीं थे
जहाँ पड़े दुश्मन के क़दम
वहीं किया हमने उसको बेदम
घुस कर हमारी ही ज़मीन पर उसने हमें ललकारा
हमने चुन-चुन कर उन्हें मारा
दी हमने गर देनी पड़ीं अपनी जान
पर कम ना होने दी तिरंगे की शान
दिल में जोश लिए, हौसलें बुलंद कर
हम जीएं तूफानों से आँख मिलाकर
अपने ख़ून से लिखी हमने जीत की इबारत
भूल ना जाना, याद रखना हमारी शहादत
- ऋतुराज परिहार (बाग़ी)
