सोचूं तुम्हें तो रूह महकने लगती हैदेखूं तुम्हें तो आंखें धड़कने लगती हैकौन हो तुम, क्या हो तुम मेरेबस यही सोच के ज़िंदगी गुनगुनाने लगती है।।
सोचूं तुम्हें तो रूह महकने लगती हैदेखूं तुम्हें तो आंखें धड़कने लगती है
कौन हो तुम, क्या हो तुम मेरेबस यही सोच के ज़िंदगी गुनगुनाने लगती है।।