पिता ❣❣
बच्चों के मूर्तिकार
कभी अभिमान तो, कभी स्वाभिमान है पिता
कभी धरती तो, कभी नभ है पिता
जन्म दिया है अगर माँ ने
तो पहचान है पिता…
माँ अगर पैरों पर चलना सिखाती हैं,
तो उन पैरों की ताक़त हैं पिता....
माँ अगर है मासूम सी लोरी…
तो जिंदगी की कहानी है पिता….”
माँ की डाट में प्यार हैं
तो पिता की फ़टकार में अनुशासन हैं
कभी ख़्वाब को पूरी करने की जिम्मेदारी है तो
कभी आंसुओं में छिपी लाचारी है पिता,
बच्चों की जिंदगी के मूर्तिकार हैं पिता...
कभी हंसी और खुशी का मेल है पिता,
तो कभी तन्हा और अकेला है पिता…
माँ तो कह देती है थी अपने दिल की हर बात…
सबकुछ दिल में छुपाकर मुस्कुराते हैं पिता...✍✍❣❣
ऋतु भटनागर✍✍
उदयपुर (राज.)


