मिली थी एक सफर में मुझे वह लड़की अनजानी सी
फिर उसकी जिंदगी एक अद्भुत कहानी सी
अंजान होकर भी मुझसे बातें किया करती थी
बातों बातों में मेरे सभी दुख जान लिया करती थी
मुस्कुराता हुआ चेहरा भोली सी सूरत थी
नन्ही सी मुस्कान प्यारी सी मूरत थी
कोई मंजिल नहीं थी उसकी सिर्फ चलती जा रही थी
उसकी बातें सारी मन को भा रही थी
देखती थी खुली आंखों से सपने सुहाने से
करवाती थी अपनी इच्छा पूरी रूठने के बहाने से
जब होती थी हमारे साथ हंसते हंसाते सबको
पर अकेले में रोया करती याद करके जाने किसको
उसकी उन आंखों में मैं एक दर्द महसूस किया करती थी
फिर भी वह सभी के साथ खुल कर जिया करती थी
उसकी उस हंसी के पीछे शायद कोई दर्द छिपा था
जाने कौन सा दुख कुदरत ने उसकी किस्मत में लिखा था
कोई तो गहरा दुख था उसे जिसे हमसे छुपाती थी
पूछने पर भी उससे वह नहीं बताती थी
अब भी याद आती है वह उसकी वह अनजान परेशानी
पर नहीं जान पाई मैं उसकी दर्द भरी कहानी