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मेरे अल्फाज़

माँ! एक दिन ऐसा भी आये
मैं सरहद पर रहूं
तू गर्व से घर पर रहे

तू जब फोन मिलाये
मैं बोलूं, तो तेरा सर फक्र से उठ जाये

तू न डरे, बस तू मेरा ताकत बन जाये
गर आंच आये सरहद को भी, तो मेरा तन शहीद हो जाये.....

तू सुनके न रोए....गर रोए
तो तेरे हर आंसू मेरे मरहम बन जाये<
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