जो नशा तेरी आंखों में है,

वो शराब और कबाब में कहां।

जो महक तेरे बदन में है,

वो गुलाब में कहां।

जो आंनद तेरी चाल में,

वो नृत्य में कहां।

जो मौन तेरे होठों पे है,

वो हिमालय पे कहां।

जो गहराई तेरी आवाज़ में है,

वो समुंदर में कहां।

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जो होना पड़ा तेरे से दूर,

तो असा पश्चाताप कहां।