जब सारे सूर्यों की रोशनी अंधेरे के सागर में
गहरी जाती जाएंगी,
और विलुप्त हो जाएंगी ।
और कोई और
उन्हीं सूर्यों जैसा दिखता, लगता, जमता आएगा
और एक चिंगारी से अंधेरे को दूर भगाएगा,
तब जब उस नए प्रकाश में
नया काग़ज नयी कलम लेकर
नए मस्तिष्क द्वारा नए नियमों को
इंसानों के लिए लिखा जाएगा,
और हजारों भेदों के बीच
अगर कोई सिकुड़ती जगह बच जाएगी
तो उसे पृथ्वी कहा जाएगा ।
तब फिर शायद मैं और तुम
हल्का सा ही सही पर
मुस्कुरा कर,
उस पृथ्वी नामक जगह पर मिल सकेगें ।


