आज कमरो से छुप-छुपाकर,
अन्धेरे के पास जा कर,
तारो के सामने खड़े हो कर,
नज़रे सीधी मुँह लटकाकर,
मैनें कुछ यादों को धुएँ में उड़ा दिया,
होठों से चाँद के आगोश में दे कर,
मैनें कुछ बातों को बादलों में मिला दिया,
मैनें कुछ यादों को धुएँ में उड़ा दिया ।
तुम्हारी आँखों को अपनी आँखों से हटा दिया,
तुम्हारी किलकारि को कानो से मिटा दिया,
कुछ अलग, शायद गलत है किया,
अन्धेरे को मैनें खुलकर बता दिया,
अपना हाल धुएँ की शक्ल में सुना दिया,
सर चकराया, मन घबराया,
पर दिल ना रुक पाया,
आज पहली दफा,
उसे हलका है किया,
ये उसने मुझे बताया,
तो आज तुमको शायद पूरा भुला दिया,
कुछ यादों को मैंने धुएँ में उड़ा दिया ।


