निराशा से लदे नयनों के भीतर अभी उम्मीद की चमक बाकी है,झुके कंधों के अंदर भी अभी लड़ाई की शक्ति काफी है,घृणा को चाहे जितना खिला-पिला कर बढ़ा दो तुमशिक्षा बेवकूफ़ी को भगाने की अभी भी बहुत आदि है ।
निराशा से लदे नयनों के भीतर अभी उम्मीद की चमक बाकी है,झुके कंधों के अंदर भी अभी लड़ाई की शक्ति काफी है,
घृणा को चाहे जितना खिला-पिला कर बढ़ा दो तुमशिक्षा बेवकूफ़ी को भगाने की अभी भी बहुत आदि है ।