स्वदेशी अपनाये स्वदेशी अपनाये,
आधुनिकता के नाम पे ये कैसे खेल हो रहे है,
भारतीय उत्पाद बनकर पप्पु फ़ैल हो रहे है,
आयुर्वेद से पढ़कर ही इतने उत्पाद बनाये,
ब्रांडेड-ब्रांडेड कहकर लोगों को चिपकाये,
खादय पदार्थों के रसायन से मेल हो रहे हैं,
इन गोरख़ धन्धे वालों के फिर भी बेल हो रहे है,
भारतीय उत्पाद बनकर पप्पु फ़ैल हो रहे है,
अवसरवादी इस दौड़ में सब रेल हो रहे हैं,
अपनी संस्कृति भुल फैशन की देन हो रहे हैं,
भौतिकता के दंगल में सब रेलम-पेल हो रहे हैं,
भारतीय लघु उद्योग सारे फैल हो रहे हैं,
आधुनिकता के नाम पे ये कैसा खेल हो रहे है,
भारतीय उत्पाद बनकर पप्पु फ़ैल हो रहे है,
भारतीय उत्पाद बनकर पप्पु फ़ैल हो रहे है,
अपने देश को विकसित करने का बस अब एक उपाय,
स्वदेशी अपनाये स्वदेशी अपनाये।
जय हिन्द।
स्वदेशी अपनाये स्वदेशी अपनाये।
जय हिन्द।
जय भारत।
लेखक-रितेश गोयल 'बेसुध'

