आज की मीरा की किस्मत में माधव नहीं गलतियों और कमियों से भरा एक मानव है कभी पटरियों पर बिखरी लाश से या नहर में तैरते पार्थिव शरीर ही उसके इश्क का अंजाम है कभी रात के अंधेरे में नोची जाती या जलती सरे आम है


आज की मीरा की किस्मत में माधव नहीं गलतियों और कमियों से भरा एक मानव है कभी पटरियों पर बिखरी लाश से या नहर में तैरते पार्थिव शरीर ही उसके इश्क का अंजाम है कभी रात के अंधेरे में नोची जाती या जलती सरे आम है