यूं तो गुज़रता दिन

आने वाले कल के लिए दरवाजे खोल जाता है

भले-बुरे यादों को भूल

कल एक नई शुरुआत करने की सलाह दे जाता है

अंधेरे के बाद रोशनी का आगाज होता है

हर गम के बाद खुशी का इंतज़ार होता है

समय निर्धारित करने वाली टिक टिक बढ़ती घड़ी

समय के साथ उसके काटें खुद बढ़ जाते हैं

गले लाग्ने वाले अपने

एक अरस गुजरने के बाद

बस मुस्कुरा कर चले जाते है

गम में सहारा देने वाले खुद गम दे जाते है

सुनहरे भविष्य के दरवाजे खुल जाते है

और बचपन गुज़र जाता है

परिपक्वता आ जाती है

और नादानी सिमट कर रह जाती है

प्यार तो होता है

पर मनमरजिया कम हो जाती है

यूं तो गुज़रता दिन

आने वाले कल के लिए दरवाजे खोल जाता है

भले बुरे यादों को भूल

कल एक नई शुरुआत करने की सलाह दे जाता है ।