मैं तुम्हें रोज़ अपने मन मुताबिक लिखता हूँ ,
रोज़ अपनी रचनाओं में तुम्हे और ज्यादा प्यार करता हूँ।
मैं उन रचनाओं को पूर्ण नही करता, रखता हूँ थोड़ी सी कसर बाकी, कि कल मैं तुम्हे और ज्यादा प्यार कर सकूं।
-ऋषि


मैं तुम्हें रोज़ अपने मन मुताबिक लिखता हूँ ,
रोज़ अपनी रचनाओं में तुम्हे और ज्यादा प्यार करता हूँ।
मैं उन रचनाओं को पूर्ण नही करता, रखता हूँ थोड़ी सी कसर बाकी, कि कल मैं तुम्हे और ज्यादा प्यार कर सकूं।
-ऋषि