तुमको जब लिखूंगा तो कुछ नया लिखूंगा

पहले अपनी जबां में फिर किसी नई जबां में लिखूंगा


कोई और ना पढ़ ले कभी तुम्हारी हकीकत

इसलिए हर रोज एक नई जबां लिखूंगा


सुना है अब कई लोग रखते हैं इंसानी जबां की समझ

सो इस बार मैं परिंदो की जबां लिखूंगा


तेरी ओर मेरा इशारा कभी नहीं होगा

मैं सारे इशारे आसान जबां में लिखूंगा


ये जो लोग उम्दा हैं कहानियां गढ़ने में

मैं हर बात उनकी समझी जबां में लिखूंगा


ऋषभ शुक्ला