बुरे नहीं अच्छे नहीं यह वक़्त के ग़ुलाम हैं,
मुझे परेशान करते हज़ारों खयाल हैं।
कुछ भूत के कुछ भविष्य के कुछ अपनों के कुछ परायों के,
आसान सवालों के मुश्किल जवाब हैं।
मुझे परेशान...
क्या खोया क्या पाया क्या खर्चा क्या कमाया,
कहीं बंद रखे मैंने ज़िन्दगी के हिसाब हैं।
मुझे परेशान...
हस के जिए घुट के मरे सोच समझ के या मनमर्जी से
एक मंज़िल के रास्ते हज़ार हैं
मुझे परेशान...


