मुझे चांद पर जाना हैं,
आसमा की ऊंचाइयों तक तिरंगा लहराना हैं ।
यू तो बहुत मुश्किल हैं ये,
मुझे इन मुश्किलों से आगे चलते जाना है,
आसमा की ऊंचाइयों तक तिरंगा लहराना हैं।
आगे आने वाली हर उलझन को सुलझाना,
मुझे चट्टान की तरह खड़े रहना है।
चाहे लाख मुसीबतें क्यूं न आए,
स्वयं को कभी पीछे नहीं हटाना है,
मुझे चांद पर जाना है,
आसमा की ऊंचाइयों तक तिरंगा लहराना हैं।


