चांद से पूछ लो
क्या चौथ और ईद पर
कभी रंग - ढंग बदलता है।
वो तो सबके लिए एक चाल-सा चलता है।
कभी नहीं हिंदू- मुस्लिम कुछ कहता है
तो हम ये जाति-पाति सीखें कहां से बैर-भाव मस्तिष्कों में लिखे कहां से। फूल-फल, पेड़ों से पाया किसी ने अलग-अलग। क्या नदियों, ने जल पिलाया किसी को अलग-अलग।। क्या सूरज-चंदा ने किरणे पहुंचाया किसी तक अलग-अलग। क्या मिट्टी का उपजाऊपन हुआ किसी के लिए अलग-अलग।। फिर हमने ही क्यूं बांटा जाति - पाति मजहब में खुद को अलग-अलग।।
