खुशियों का पैगाम लिए   सुन्दर नन्हें हाथों में थामे    बाबू जी के अरमान लिए    मैं जन्मी माँ केआँगनमें।।१।।   जन्म हुआ मेरा मैं  खुश थी   मन में इक  विश्वास लिए   प्यार मिलेगा माँ - बाबू का   बड़े भाई का स्नेह लिए   मैं जन्मी माँ केआँगन में।। २।।  बचपन  में माँ का प्रेम मिला  बाबू जी खातिर तरस गई  लेकिन भैया का प्रेम मिला,  तो अखियाँ जैसे बरस गई  मैं  जन्मी माँ के आँगन में।।३।।   नन्हें -२ हाथों से भैया ने चलना सिखाया  अम्मा ने प्यारे हाथों से जो काज़ल माथ लगाया   बाबू जी ने बिन मन के जो मुझको गोद  उठाया   तो  ऐसा लगा कि सारी खुशियाँ अब मैं  जोड़    चली ,  मैं जन्मी माँ के आंगन में।। ४।।            जब मै कुछ बड़ी हुई घर पर            माँ का हाथ बटाती थी,            भैया की उंगली पकड़कर            मैं  भी पढ़ने जाती थी ,           बाबू जी का कहना सुनती            तनिक न मैं  लजाती थी ,          सबकी इज़्ज़त खातिर करने में           मैं अपने को भूल गई ,          मैं जन्मी माँ के आँगन में।। ५।।    मेरे बिटिया होने का जो लाभ जग ने  उठाया    मेरा शोषण करके किसी ने बंधक मुझे बनाया   कुछ ने मेरी रूह से खेला ,कुछ ने झूठा प्यारा दिखाया  कुछ ने मेरी आबरू को इतना तार -तार किया           कि उस पल जीने से अच्छा है,          मैं  मरकर उसपार चलूँ           मैं  मरकर उसपार चलूँ ,         मैं  बिटिया जन्मी माँ के आँगन में।। ६।।